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दशहरा मनाना कितना उत्तम

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🏵️ आओ जाने 🏵️ दशहरे के बारे में पूरे देश में दशहरा बड़े हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है दशहरे के बारे में सभी का यही मानना है कि राम जी के द्वारा रावण का वध किए जाने पर दशहरे मनाया जाता है यह अधर्म पर धर्म की विजय स्थापना करने वाला त्यौहार है  🏵️यह त्यौहार आज किस लिए मनाना जरूरी है 🏵️ आज हर तरफ देखा जा रहा है अन्याय दुराचार भ्रष्टाचार चोरी डकैती लूट मारी जैसे बड़े रावण समाज के अंदर बैठे हुए हैं हर साल दशहरा मनाने से रावण का पुतला जला देने से बुराइयां खत्म नहीं होती बुराइयों को खत्म करने के लिए ज्ञान होना अति आवश्यक है क्योंकि व्यक्ति को जब ज्ञान होता है तो वह बुरे काम नहीं करता और ज्ञान प्राप्त होता है सत्संग से सत्संग में ही व्यक्ति को बताया जाता है कि उसके जीवन का मूल उद्देश्य क्या है वर्तमान समय में जो वास्तविक सत्य ज्ञान है वह केवल संत रामपाल जी महाराज बता रहे हैं दशहरा मनाने से कोई फायदा नहीं है क्योंकि जब तक मनुष्य के अंदर का रावण नहीं मरेगा तो बाहर का रावण मारने से कोई मतलब नहीं आ रहा और जब तक व्यक्ति सत्संग के निकट नहीं जाता उसके अंदर की बुराइयां नहीं छोड़ती...

नवरात्रि पर्व

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🏵️नवरात्रि पूजा  🏵️ हिन्दू धर्म में प्रचलित है। इस त्योहार को सभी हिन्दू बहुत उत्साह से मनाते है क्योंकि वह मां दुर्गा को जगत जननी ओर ब्रह्माण्ड की रचना करने वाली मानते है। नवरात्रि के इस पर्व पर 9 दिन पूजा करने का प्रावधान मानते है जिसमें मां दुर्गा के 9 अवतारों का पूजन किया जाता है।  लेकिन क्या मां दुर्गा ने इस तरह से पूजा की विधि बताई है? आइए जानते हैं श्रीमद् देवी भागवत गीता में दुर्गा मां हिमालय राजा को उपदेश करते हुए कहती है कि मेरी भक्ति छोड़ कर उस ब्रह्म की पूजा करो जिसका ओम मंत्र है इसका अर्थ हुआ की देवी जी अपने से ऊपर परमात्मा के बारे में बताती है और उसको पाने की विधि भी बताती है। तो फिर सभी नकली गुरु मां दुर्गा की आराध्या करने के लिए क्यों कहते हैं जबकि श्रीमद् देवी भागवत पुराण में साफ मना किया है मां दुर्गा ने कि मेरी भक्ति छोड़ के ब्रह्म की भक्ति करो। इसका मतलब यह हुआ की नवरात्रि पूजा शास्त्रों के विरुद्ध साधना है जोकि गीता के 16 अध्याय के 23-24 श्लोक में मना किया गया है कि जो शास्त्रों की विधि त्याग कर मन माना आचरण करता हैं उसे ...

महात्मा बुद्ध की कैसी थी भक्ति साधना

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क्या बुद्घ को मोक्ष प्राप्ति हुई।  महात्मा बुद्ध से सभी परिचित है। जिन्होंने जीवन जीने के कुछ शिख दी थी और बुद्ध ईश्वर के अस्तित्व को ना मानते थे ओर ना ही अपने अनुयाइयों को कहते थे कि भगवान है। अपने उपदेशों में उन्होंने अनिश्वरवाद को समर्थन दिया है। पर इसके पीछे क्या कारण था कि उन्होंने ईश्वर के अस्तित्व को नकारा। आइए जानते है।  गौतम बुद्ध (जन्म 563 ईसा पूर्व – निर्वाण 483 ईसा पूर्व) एक श्रमण थे जिनकी शिक्षाओं पर बौद्ध धर्म का प्रचलन हुआ। इनका जन्म लुंबिनी में 563 ईसा पूर्व इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था। उनकी माँ का नाम महामाया था बुद्ध भगवान को चाहने वाली एक पुण्य आत्मा थी लेकिन क्या भगवान को पाने के लिए बुद्ध ने शास्त्रों के ज्ञान को पढ़ा ?? नहीं। बुद्ध ने दूसरे की देखा देखी करके हठ योग किया को की शास्त्रों के विरुद्ध है। शास्त्रों जैसे चारो वेद ओर गीता में कहीं भी हठ योग का प्रमाण नहीं है । बुद्ध ने हठ योग से भगवान की खोज करने की कोशिश की लेकिन उन्हें भगवान नहीं मिले क्युकी यह परमात्मा प्राप्त करने की विधि नहीं है। ...

बाईबल में जीव के लिए परमात्मा का आदेश

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पवित्र बाइबिल अय्यूब 36: 5 के अनुसार पूर्ण परमात्मा परमेश्वर कबीर (शक्तिशाली) है, किन्तु वह लोगों से घृणा नहीं करता है। परमेश्वर कबीर (सामर्थी) है और विवेकपूर्ण है। बाइबल ने भी स्पष्ट किया है की प्रभु का नाम कबीर है। कबीर ही सम्पूर्ण सृष्टि के रचनाकार है। वहीं सब का धारण पोषण करते है। वास्तव में परमात्मा का नाम कबीर है। वेदो में, भगवद गीता में, श्री गुरु ग्रंथ साहिब में और कुरान शरीफ में भी परमात्मा का नाम कबीर है। कबीर परमात्मा के सभी प्राणी जीव है। जीव हिंसा सबसे बड़ा पाप है। भगवान ने मनुष्य को शाकाहारी भोजन खाने के आदेश दिये हैं - पवित्र बाइबल पवित्र बाइबल - उत्पत्ति  1:29 - फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तुम को दिए हैं; वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं:  1:30 - और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगने वाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गय...

कबीर साहेब जी की लीलाएं

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सिकंदर लोदी के जलन का रोग ठीक करना दिल्ली के राजा सिकंदर लोदी के जलन का रोग था। वह अपने रोग से बहुत परेशान था । उसने कई वेधो को दिखाया हर प्रकार की दवा ले ली परन्तु उसका ये रोग ठीक नहीं हुआ । उसके रोग में रत्ती भर भी आराम नहीं आया । काशी का राजा बीरदेव सिंह बघेल सिकंदर लोदी का आधीन राजा था। सिकंदर लोदी काशी में उसके पास आया और अपना दुख को सांझा किया।  राजा बघेल कबीर साहेब का शिष्य था। वो परमात्मा के गुण से परिचित था । जब उसने सिकंदर लोदी का दुःख सुना तो उसने बादशाह सिकंदर लोदी को कहा कि आप कबीर साहेब के पास चलिए उनकी रजा हुई तो आपका रोग ठीक हो सकता है । सिकंदर लोदी ने कहा कि बुला को कबीर साहेब को , तो राजा बघेल ने कहा कि संतो को बुलाया नहीं करते उनके पास खुद चल के जाना चाहिए। सिकंदर अपने रोग से छुटकारा पाना चाहता था तो वह राजा बिरदेव के साथ चल पड़ा । उस समय रामानन्द जी कबीर साहेब के शिष्य बन चुके थे ओर कबीर साहेब प्रतिदिन वहां शाम को आते थे । जब राजा बघेल के साथ सिकंदर वहा पहुंचा तो पता चला कि कबीर साहेब अभी आश्रम में नहीं थे । फिर सिकंदर लोदी ने रामानन्द जी से ...

खराब शिक्षा पद्धति

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🏵️शिक्षा का महत्व  🏵️ हमारे देश में शिक्षा का प्राचीन समय से ही महत्व है। क्योंकि शिक्षा होने पर ही हम ज्ञान ग्रहण के सकते है । पुराने समय में शिक्षा का उद्देश्य अपने धर्म शास्त्रों को पढ़ कर उनका अनुसरण करना तथा अपना जीवन में संस्कारो को ग्रहण करना था परन्तु वर्तमान में शिक्षा पद्धति बदल गई है शिक्षा का उद्देश्य मात्र पैसे कमाना रह गया है किसी भी व्यक्ति को शिक्षा इस लिए दिलाई जाती है ताकि वह बड़ा होक एक अच्छी सी सरकारी नौकरी लग जाए ,मात्र इतना सा अर्थ रह गया शिक्षा का, जिससे कि शिक्षा पद्धति खराब होती जा रही है और अभी इसका बिगड़ा रूप हमारे सामने है। 🏵️वर्तमान समय मे शिक्षा से बिगड़ता समाज  🏵️ अपने आप को आधुनिक मानव कहने वाले लोगों में सभ्यता ओर संस्कार नाम कि कोई भी चीज नहीं है ओर ऐसा इसीलिए क्योकि  शिक्षा से लोगों में चतुराई आ गई है लोग एक दूसरे से प्रेम से रहने के जगह एक दूसरे को हानि पहुंचाने की सोचते है  आपस में परिवारों में बनती नहीं क्युकी उच्च शिक्षा प्राप्त कर लोग अपनों से ही गेरो जैसा बर्ताव करने लग जाते है। जहां ...

संस्कारो का होता पतन

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🏵️ संस्कारों की होती हानि 🏵️   हमारा देश अपनी संस्कृति और अपनी  संस्कारों की वजह से पूरे विश्व में जाना जाता है  और यही भारत देश की  पहचान है  एक संस्कृति का देश जो कि  अपनी  शान  के लिए  पूरे विश्व में प्रसिद्ध है  भारत में  एक सभ्यता है  जो बहुत पुरानी है  और उसी सभ्यता का  लाभ  नौजवानों को  मिलता आया है  परंतु  वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति का  प्रभाव होने के कारण संस्कारों  की हानि हुई है  इनका मुख्य कारण देश में फैली  पाश्चात्य संस्कृति की बुराइयां है जैसे फैशन     नशा   फिल्में   अश्लील गाने   असभ्य तरीके का रहन सहन  इन कारणों की वजह से देश में युवाओं  मैं संस्कारों की और सभ्यता की  हानि हुई है  🏵️ संस्कारों के पतन पर रोकथाम 🏵️  हमारी सभ्यता को और हमारी संस्कृति को इस पाश्चात्य  संस्कृति से बचाने की जरूरत है युवाओं में आध्यात्मिक ज्ञान होना जरूरी है जो कि हमा...