नवरात्रि पर्व

🏵️नवरात्रि पूजा 🏵️
हिन्दू धर्म में प्रचलित है। इस त्योहार को सभी हिन्दू बहुत उत्साह से मनाते है क्योंकि वह मां दुर्गा को जगत जननी ओर ब्रह्माण्ड की रचना करने वाली मानते है।
नवरात्रि के इस पर्व पर 9 दिन पूजा करने का प्रावधान मानते है जिसमें मां दुर्गा के 9 अवतारों का पूजन किया जाता है। 
लेकिन क्या मां दुर्गा ने इस तरह से पूजा की विधि बताई है?
आइए जानते हैं
श्रीमद् देवी भागवत गीता में दुर्गा मां हिमालय राजा को उपदेश करते हुए कहती है कि मेरी भक्ति छोड़ कर उस ब्रह्म की पूजा करो जिसका ओम मंत्र है
इसका अर्थ हुआ की देवी जी अपने से ऊपर परमात्मा के बारे में बताती है और उसको पाने की विधि भी बताती है।
तो फिर सभी नकली गुरु मां दुर्गा की आराध्या करने के लिए क्यों कहते हैं जबकि श्रीमद् देवी भागवत पुराण में साफ मना किया है मां दुर्गा ने कि मेरी भक्ति छोड़ के ब्रह्म की भक्ति करो।

इसका मतलब यह हुआ की नवरात्रि पूजा शास्त्रों के विरुद्ध साधना है जोकि गीता के 16 अध्याय के 23-24 श्लोक में मना किया गया है कि जो शास्त्रों की विधि त्याग कर मन माना आचरण करता हैं उसे किसी भी प्रकार के न तो सुख की प्राप्ति होती है और ना ही गति होती है और ना सिद्धि प्राप्त होती है अर्थात व्यर्थ है वर्तमान समय में शास्त्रों के अनुसार सत साधना जो वास्तविक भक्ति की साधना है वह केवल संत रामपाल जी महाराज बता रहे हैं संत रामपाल जी महाराज जी ने सभी धर्म के साथ ग्रंथों से यह प्रमाणित कर दिया है कि पूर्ण परमात्मा कौन है जिस पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने से जीव को सांसारिक लाभ के साथ साथ पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति होगी वह परमात्मा कौन है जानने के लिए अवश्य देखिए साधना टीवी रात्रि 7:30 से 8:30 और अधिक जानकारी के लिए पढ़िए संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित अनमोल पुस्तक ज्ञान गंगा ,जीने की राह ,भक्ति से भगवान तक, गीता तेरा ज्ञान अमृत।।

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