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Showing posts from June, 2020

महात्मा बुद्ध की कैसी थी भक्ति साधना

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क्या बुद्घ को मोक्ष प्राप्ति हुई।  महात्मा बुद्ध से सभी परिचित है। जिन्होंने जीवन जीने के कुछ शिख दी थी और बुद्ध ईश्वर के अस्तित्व को ना मानते थे ओर ना ही अपने अनुयाइयों को कहते थे कि भगवान है। अपने उपदेशों में उन्होंने अनिश्वरवाद को समर्थन दिया है। पर इसके पीछे क्या कारण था कि उन्होंने ईश्वर के अस्तित्व को नकारा। आइए जानते है।  गौतम बुद्ध (जन्म 563 ईसा पूर्व – निर्वाण 483 ईसा पूर्व) एक श्रमण थे जिनकी शिक्षाओं पर बौद्ध धर्म का प्रचलन हुआ। इनका जन्म लुंबिनी में 563 ईसा पूर्व इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था। उनकी माँ का नाम महामाया था बुद्ध भगवान को चाहने वाली एक पुण्य आत्मा थी लेकिन क्या भगवान को पाने के लिए बुद्ध ने शास्त्रों के ज्ञान को पढ़ा ?? नहीं। बुद्ध ने दूसरे की देखा देखी करके हठ योग किया को की शास्त्रों के विरुद्ध है। शास्त्रों जैसे चारो वेद ओर गीता में कहीं भी हठ योग का प्रमाण नहीं है । बुद्ध ने हठ योग से भगवान की खोज करने की कोशिश की लेकिन उन्हें भगवान नहीं मिले क्युकी यह परमात्मा प्राप्त करने की विधि नहीं है। ...

बाईबल में जीव के लिए परमात्मा का आदेश

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पवित्र बाइबिल अय्यूब 36: 5 के अनुसार पूर्ण परमात्मा परमेश्वर कबीर (शक्तिशाली) है, किन्तु वह लोगों से घृणा नहीं करता है। परमेश्वर कबीर (सामर्थी) है और विवेकपूर्ण है। बाइबल ने भी स्पष्ट किया है की प्रभु का नाम कबीर है। कबीर ही सम्पूर्ण सृष्टि के रचनाकार है। वहीं सब का धारण पोषण करते है। वास्तव में परमात्मा का नाम कबीर है। वेदो में, भगवद गीता में, श्री गुरु ग्रंथ साहिब में और कुरान शरीफ में भी परमात्मा का नाम कबीर है। कबीर परमात्मा के सभी प्राणी जीव है। जीव हिंसा सबसे बड़ा पाप है। भगवान ने मनुष्य को शाकाहारी भोजन खाने के आदेश दिये हैं - पवित्र बाइबल पवित्र बाइबल - उत्पत्ति  1:29 - फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तुम को दिए हैं; वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं:  1:30 - और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगने वाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गय...

कबीर साहेब जी की लीलाएं

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सिकंदर लोदी के जलन का रोग ठीक करना दिल्ली के राजा सिकंदर लोदी के जलन का रोग था। वह अपने रोग से बहुत परेशान था । उसने कई वेधो को दिखाया हर प्रकार की दवा ले ली परन्तु उसका ये रोग ठीक नहीं हुआ । उसके रोग में रत्ती भर भी आराम नहीं आया । काशी का राजा बीरदेव सिंह बघेल सिकंदर लोदी का आधीन राजा था। सिकंदर लोदी काशी में उसके पास आया और अपना दुख को सांझा किया।  राजा बघेल कबीर साहेब का शिष्य था। वो परमात्मा के गुण से परिचित था । जब उसने सिकंदर लोदी का दुःख सुना तो उसने बादशाह सिकंदर लोदी को कहा कि आप कबीर साहेब के पास चलिए उनकी रजा हुई तो आपका रोग ठीक हो सकता है । सिकंदर लोदी ने कहा कि बुला को कबीर साहेब को , तो राजा बघेल ने कहा कि संतो को बुलाया नहीं करते उनके पास खुद चल के जाना चाहिए। सिकंदर अपने रोग से छुटकारा पाना चाहता था तो वह राजा बिरदेव के साथ चल पड़ा । उस समय रामानन्द जी कबीर साहेब के शिष्य बन चुके थे ओर कबीर साहेब प्रतिदिन वहां शाम को आते थे । जब राजा बघेल के साथ सिकंदर वहा पहुंचा तो पता चला कि कबीर साहेब अभी आश्रम में नहीं थे । फिर सिकंदर लोदी ने रामानन्द जी से ...