दहेज-एक अभिशाप
भारतवर्ष में शुरू से ही कई रीति रिवाज समाज में रहे है । क्युकी देश की संस्कृति ही है धार्मिक लेकिन कुछ घटनाओं या या कुछ कार्य ऐसे भी हुए है जो इस समय पर मात्र एक घटना थी परन्तु वर्तमान में उसने एक कुप्रथा का जन्म ले लिया जिसके बोझ तले लाखों परिवार बर्बाद हो चुके है । वह कुप्रथा है - दहेज़ प्रथा , जो कि वर्तमान में लड़कियों के लिए एक अभिशाप बना हुआ है ।
🏵️अभिशाप कैसे?🏵️
प्रतिदिन समाचार पत्रों में ऐसी घटनाएं होती है जिसमें महिलाओं पर दहेज कि वजह से प्रताड़ना मिलती है उनको विवश किया जाता है कि वह उसके परिवार से पैसे की मांग करे ताकि वो अपना स्वार्थ पुरा कर सके ओर अगर महिला ऐसा नहीं करती है तो ससुराल वाले धन के लोभी व्यक्ति उन लड़कियों को मार देते है । तो ये दहेज़ प्रथा लड़कियों के लिए अभिशाप से कम नहीं है क्या?
लड़कियों पर हो रही इस आत्याचर का एक ही हल है कि इस कुप्रथा को जड़ से समाप्त कर दिया जाए। वर्तमान में सरकार भी बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों से लड़कियों के अधिकार के लिए लोगो को जागरूक के रही है परन्तु ये फिर भी कारगर सिद्ध नहीं हो रहा क्युकी घटनाएं कम हो ही नहीं रही ।
पूर्ण संत के ज्ञान आधार से दहेज प्रथा का नाश
वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज जी जो कि शास्त्रों के अनुसार भक्ति मार्ग देते है ओर अपने अनुयाईयो को तत्वज्ञान से अवगत करवाया है । तत्वज्ञान वह विज्ञान जिसे समझ कर संत रामपाल जी महाराज के करोड़ों अनुयाइयों ने दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म करने का बीड़ा उठाया है । क्युकी आध्यात्म ही वह शक्ति है जो इस प्रकार की बुराई को समाज से जड़ से खत्म कर सकती है । संत रामपाल जी महाराज जी ने समाज से बुराइयों को समाप्त करने का बेड़ा अपने कंधो पर लिया है ओर अपने भक्तो को भी यही शिक्षा और दहेज मुक्त विवाह , बिलकुल साधारण तरीके से बिना की अनावश्यक खर्च के करने को प्रेरित किया है ताकि समाज से ये बुराई ख़तम हो ओर लाख
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