संतो की शिक्षा

 संतो की शिक्षा 

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भारत एक ऐसा देश है जहा पर सभी साधु संतो का आदर सत्कार किया जाता है भारत की भूमि को संतो की पवित्र भूमि कहा जाता है यहाँ हर व्यक्ति परमात्मा की सत साधना करने के लिए गुरु धारण करता है परन्तु संसार में गुरु की बाढ़ सी आई हुई है इसमें यह समझ पाना की कोन है पूर्ण संत इस बात का निर्णय लेना बड़ा ही मुश्किल हो गया है आज का व्यक्ति संत उन्हें मनाता है जिन्होंने कंठी माला और भगवा वस्त्र धारण कर रखे हो...... यह कोई पहचान नहीं है पूर्ण संत की जो पूर्ण संत होता है वह परमातम की सत भक्ति के साथ साथ व्यक्ति के विकारो को भी ख़तम करता है और मनुष्ये जन्म का मूल उद्देश्य जिव को समझाते है क्योकि वह इस बात से परिचित होते है की यह सब काल का लोक है यहाँ किस बात पर मनुष्ये ख़ुशी मना रहा है " एक बार एक सेठ था वह एक संत के आश्रम में गया! उन संत की कृपा से उस सेठ को बहुत अच्छा लाभ अपने कारोबार में हो रहा था वह सेठ खुश होकर उन संत के लिए सेब संतरो और केलो का बड़ा थैला  भरकर उनके पास ले गया उस संत ने उन फलो को अपने कुछ शिष्यों को बाँट दिए तब सेठ ने संत से कहा की आप फल क्यों नहीं खाते?  तब संत जी ने कहा की मुझे मेरी मोत दिखाई देती है मुझे यह सब नहीं खाया जाता |  तब सेठ ने कहा की महाराज जी मोत तो सब को आनी फिर क्यों डरना है ?  वह सेठ हर बार आये और उन संत से इसी बारे में बात करे | उस नगरी का राजा भी उस संत का भक्त था उस संत ने उस राजा से कहा की आपकी नगरी में एक रामलाल नाम का सेठ है उसको फांसी की सजा सुना दो और फांसी का समय एक महीने के बाद चांदनी चौदस का रखना | और उसके खाने में दूध सेब संतरे और खीर हलवा पूरी सब देना है | राजा ने अपने गुरु जी की आज्ञा का पालन किया और उस सेठ को जेल के अंदर  20  दिन हो गए थे वह सेठ बिलकुल निर्बल हो गया था | वह संत जेल में प्रत्येक बंदी से मिला | सेठ जी को देख कर संत जी ने पूछा कहाँ के रहने वाले हो ?  क्या नाम है ? यह सुनकर सेठ ने कहा की आपने मुझे पहचाना नहीं में रामलाल सेठ हु तब संत ने कहा की अरे रामलाल तुम दुर्बल कैसे हो गए ?  कुछ कहते पिते नहीं ! अरे तुम्हारे पास दूध खीर हलवा पूरी सब है फिर भी तुम क्यों नहीं खाते हो ? तब सेठ ने कहा की महाराज मुझे राजा ने मौत की सजा सुनाई है और में कसम खा के कहता हु की मेने कोई गुनाह नहीं किया है मेरे छोटे छोटे बच्चे है मुझे बचा लीजिये महाराज ! तब संत ने कहा की भाई मरना तो सबने है फिर क्या डरना! खा पि कर मोज़ करो तब सेठ ने कहा की महाराज जी कुछ नहीं खाया जाता मुझे तो बस वह चांदनी चौदस दिखे है तब संत ने कहा की रामलाल जैसे तुझे आज चांदनी चौदस की निश्चित मौत दिखाई दे रही है इसी प्रकार साधु संतो को चांदनी चौदस दिखाई देती है चाहे वह 40 वर्ष बाद हो........यही शिक्षा पूर्ण संत देते है की मनुष्ये जन्म पाकर परमात्मा को नहीं भूले यह मनुष्ये जन्म अनमोल है कबीर साहेब जी ने कहा है की मनुष्य जन्म दुर्बल है यह मिले न बारम्बार तरुवर जो पत्ता टूट गिरे वह बहुर न लगता डार  अवश्ये पढ़िए पुस्तक ज्ञान गंगा 

Comments

  1. मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले ना बारम्बार ।।
    जैसे पेड़ से पता टूट गिरे, बहुर न लगता डार।।

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